
नीमच - सिंगोली - कोटा रेल लाइन की मांग विगत 50 वर्षों से भी अधिक समय से उठाई जा रही है जिसके फलस्वरूप सर्वप्रथम तत्कालीन रेल मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने 12 फरवरी 2014 को इस रेल लाइन के सर्वे को स्वीकृति प्रदान की थी, जिसके प्रारंभिक सर्वे के लिए 22 लाख 50 हज़ार रुपये की राशि भी स्वीकृत की गई थी। रेल संघर्ष समिति के हस्ताक्षर अभियान और रेल नहीं तो वोट नहीं जैसे आंदोलन और पत्रकारों की सक्रियता के चलते लोकसभा चुनाव से ठीक पहले 02 फरवरी 2024 को नीमच - सिंगोली - कोटा रेल लाइन के अंतिम स्थान सर्वेक्षण (फाइनल लोकेशन सर्वे / FLS) के लिए 5 करोड़ 3 लाख 25 हज़ार की राशि स्वीकृत की गई लेकिन स्वीकृति में रेल लाइन के रुट को बदलकर नीमच - जावद - बेगूं - सिंगोली - रावतभाटा - कोटा कर दिया गया। RTI से मिली जानकारी के अनुसार 05 दिसंबर 2024 को यह ज्ञात हुआ कि नीमच - सिंगोली - कोटा रेल लाइन के FLS के अंतर्गत यातायात अध्ययन का कार्य जारी है जिसके पश्चात् रेल संघर्ष समिति के सदस्य सत्यनारायण ओझा, मेहबूब मेव, इब्राहीम बोहरा, सचिन सोनी और देवेंद्र बैरागी दिल्ली में चित्तौडगढ़ सांसद सी पी जोशी और मंदसौर सांसद सुधीर गुप्ता से मिले और इस रेल लाइन के FLS का कार्य जल्द पूर्ण करवा कर इसके निर्माण के लिए राशि स्वीकृत करवाने हेतु ज्ञापन दिया, जिस पर दोनों सांसदों ने आश्वस्त भी किया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हैदराबाद की एक कंपनी आर वी एसोसिएट्स द्वारा वर्तमान में इस रेल लाइन का फाइनल लोकेशन सर्वे कार्य किया जा रहा है जिसकी अभी तक की रिपोर्ट के अनुसार नीमच - सिंगोली - कोटा रेल परियोजना की फिजिबिलिटी माइनस 6% है जो कि इस रेल परियोजना के लिए भविष्य में हानिकारक हो सकती है। किन्तु यह सरे समीकरण तब बदल गए जब नीमच के सगराना में बनने जा रहे गोल्ड़क्रेस्ट सीमेंट के 4000 करोड़ के प्लांट का शिलान्यास मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 01 मार्च 2024 को वर्चुअल रूप से किया। आपको बता दें कि गोल्ड़क्रेस्ट सीमेंट कंपनी नीमच के सागराना में 10 हज़ार मेट्रिक टन प्रति दिन क्षमता वाला सीमेंट प्लांट लगा रही है जिसका प्रारंभिक कार्य शुरू हो चुका है। हाल ही में गोल्ड़क्रेस्ट सीमेंट के मैनेजिंग डायरेक्टर आर एस जोशी इस सम्बन्ध में भोपाल में आयोजित इन्वेस्टर्स समिट के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी मिले। प्राप्त जानकारी के अनुसार यदि नीमच - सिंगोली - कोटा रेल लाइन डलती है तो इस रेल मार्ग से गोल्ड़क्रेस्ट सीमेंट कोयला, पेट कॉक, जिप्सम, फ्लाई ऐश, स्टोन और रेड मड का इनवर्ड ट्रैफिक एवं सीमेंट और क्लिंकर का आउटवर्ड ट्रैफिक देगी जिससे रेलवे को सालाना 800 से 1000 करोड़ का रेवेन्यू होने का अनुमान लगाया जा रहा है। उपरोक्त जानकारी देते हुए रेल संघर्ष समिति के इब्राहीम बोहरा और सचिन सोनी ने बताया कि यदि नीमच - सिंगोली - कोटा रेल लाइन का कार्य पूर्ण किया जाता है तो इससे रेलवे को घाटा तो बिलकुल भी नहीं होगा बल्कि क्षेत्र में बढ़ते हुए औद्योगिक निवेश को देखते हुए वर्तमान रूट से कई गुना अधिक फायदा होगा। आपको बता दें कि प्रस्तावित रूट पर वर्तमान में आदित्य बिरला ग्रुप का विक्रम सीमेंट प्लांट, कोटा थर्मल पॉवर प्लांट, रावतभाटा का परमाणु ऊर्जा प्लांट और नीमच की नई कृषि उपज मंडी पहले से उपस्थित है। अब देखना यह है कि 4000 करोड़ के इस नए सीमेंट प्लांट से नीमच - जावद - बेगूं - सिंगोली - रावतभाटा - कोटा रेल लाइन के अंतिम स्थान सर्वेक्षण की फिजिबिलिटी रिपोर्ट पर कितना फर्क पड़ता है? यह जानकारी रेल संघर्ष समिति के इब्राईम बोहरा जावद ने दी है।