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पालसोड़ा । जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम पालसोड़ा में एक ऐसा मंदिर जो आज भी अपने चमत्कार से क्षेत्र में विख्यात हे, दरअसल हम बात कर रहे ग्राम पालसोड़ा में प्रवेश होते ही स्थित मां भैंसासरी माताजी मंदिर की, यहां के चमत्कार से हर कोई वाकिफ हे, पौराणिक मान्यता के अनुसार ओर गांव के बड़े बुजुर्गों की जानकारी के अनुसार यह माताजी का मंदिर एक समय यहां रातों रात उड़ कर आया था, जीसके बाद से यहां मंदिर की स्थापना के साथ साथ माताजी की आराधना होने लगी हे, बताया जाता हे कि यह मंदिर लगभग 917 वर्ष पूर्व आया था, जिसके बाद से ग्राम पालसोड़ा का नाथ परिवार इस मंदिर पर माताजी की सेवा करते आ रहा हे, उक्त जानकारी देते हुए पुजारी महेशनाथ, दशरथ नाथ, शंकरनाथ, सुरेशनाथ ने बताया कि वर्षों पुराना मंदिर जो यहां पूर्व में उड़ कर आया था तब से हमारे परिवार की लगभग 16 से 17 पीढ़ीया यहां पूजा और सेवा करती आ रही हे, यहां कई भक्त अपनी मुरादे लेकर आते हे ओर हंसते हंसते हुए जाते हे, हर नवरात्रि पर यहां सप्तमी पर जागरण का आयोजन होता हे वही महाअष्टमी पर भव्य हवन भी होता हे, जिसके बाद नवमी पर रात्रि 12 बजे आरती के साथ बाड़ी विसर्जन होती हे, वही साल भर में आए दिन भक्तों द्वारा अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर रविवार के दिन यहां कथा के आयोजन के साथ साथ महाप्रसादी का आयोजन भी रखते हैं, *माताजी के पास बना कुंड, कई रोग होते हे ठीक* माताजी मंदिर के पास एक कुंड भी हे, जो मंदिर के साथ साथ स्थापित हुआ था, जहां के पानी से कई रोग भी ठीक होते हे, भक्तों द्वारा बताया जाता हे कि कई बार पहले आंखों से लेकर त्वचा रोग भी ठीक हुए हे, यहां के पानी को अमृत माना जाता हे, यहां का जल आज भी अपने चमत्कार की गाथा गाता है,