आचार्य श्री महाश्रमण जी के निर्देशानुसार फारबिसगंज के आर.बी. लेन स्थित तेरापंथ भवन में धर्माराधना के क्रम में उपासक द्वय द्वारा श्रद्धालुओं को प्रेरक प्रवचनों की श्रृंखला के माध्यम से धर्म एवं जीवन प्रबंधन के विविध आयामों से अवगत कराया जा रहा है। इसी क्रम में मुख्य विषय "समय प्रबंधन" पर आयोजित प्रवचन में मुख्य वक्ता उपासक सुधांशु चंडालिया ने कहा कि समय प्रबंधन कोई नया विषय नहीं है, बल्कि इसका उल्लेख भगवान महावीर के काल से मिलता है। उन्होंने उत्तराध्ययन सूत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि "काले कालं समायरे", अर्थात जो कार्य जिस समय किया जाना चाहिए, उसे उसी समय करना ही श्रेष्ठ समय प्रबंधन है। उन्होंने कहा कि संसार के प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन समान 24 घंटे मिलते हैं, किंतु उनकी सार्थकता इस बात पर निर्भर करती है कि उनका उपयोग किस प्रकार किया जाता है। व्यक्ति को अपने समय का संतुलित उपयोग परिवार, समाज, मित्रों और संबंधियों के साथ-साथ अपने आध्यात्मिक विकास के लिए भी करना चाहिए। उन्होंने समय के सदुपयोग हेतु प्रातःकाल शीघ्र उठने, रात्रि में समय पर सोने तथा मोबाइल के अनावश्यक उपयोग से बचने की प्रेरणा दी। उन्होंने भगवान महावीर के सूत्र "संयम गोयम मा पमायए" का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन का एक भी क्षण प्रमाद में व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। इससे पूर्व सह-उपासक प्रकाश जैन ने तेरापंथ धर्मसंघ के प्रमुख श्रावक केसरीचंद भंडारी के योगदान पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आचार्य श्री भारमल जी के समय उन्होंने तेरापंथ धर्मसंघ की मजबूत नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। कार्यक्रम में बताया गया कि इससे पूर्व आयोजित प्रवचन में "परिवार में आपसी सामंजस्य कैसे बढ़ाएं" विषय पर भी उपासक द्वय ने सरल एवं रोचक शैली में अपने विचार प्रस्तुत किए, जिससे बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालु लाभान्वित हुए। उपासक द्वय द्वारा किशोर-किशोरियों के लिए अलग से ज्ञानवर्धक सत्र भी संचालित किया जा रहा है, जिसमें खेल-खेल में धार्मिक ज्ञान प्रदान किया जाता है। वहीं प्रातःकालीन सत्र में प्रेक्षाध्यान एवं योगासन के माध्यम से स्वस्थ तन और स्वस्थ मन का संदेश दिया जा रहा है। तेरापंथ भवन में प्रवचनों की यह श्रृंखला नियमित रूप से जारी है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु जैन धर्म, तेरापंथ धर्मसंघ एवं जीवन मूल्यों से संबंधित गूढ़ विषयों का सरल भाषा में लाभ ले रहे हैं।