इन तीन बातों में रखें संतोष- अन्न से संतोष: थाली में जो भी सात्विक भोजन प्राप्त हो, उसे ईश्वर का प्रसाद मानकर ग्रहण करना चाहिए। आय (इनकम) से संतोष: अपनी मेहनत से प्राप्त वैध आय में ही संतोष करना चाहिए। -पत्नी से संतोष: वैवाहिक जीवन की सुख-शांति तभी संभव है जब पति-पत्नी एक-दूसरे के प्रति निष्ठावान और संतुष्ट रहें। संतुष्टि में ही सुख है- भागवत कथा के अंतिम दिन श्रीकृष्ण के महाप्रयाण और सुदामा चरित्र का भावपूर्ण वर्णन, श्रोताओं की उमड़ी भीड़ अठाना (जावद): नगर के धाकड़ समाज धर्मशाला में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा का समापन बुधवार, 31 दिसंबर 2025 को आध्यात्मिक उत्साह के साथ हुआ। कथा के सातवें और अंतिम दिन विख्यात कथावाचक पंडित मदन लाल जी नागदा ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन की अंतिम लीलाओं का मर्मस्पर्शी वर्णन किया, जिसे सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो गए। सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष की कथा कथा की शुरुआत में पंडित नागदा ने 'सुदामा चरित्र' का वर्णन करते हुए भगवान श्रीकृष्ण और उनके सखा सुदामा की निःस्वार्थ मित्रता का उदाहरण पेश किया। उन्होंने बताया कि कैसे प्रभु अपने भक्त के प्रेम के वशीभूत होकर नंगे पैर दौड़ पड़े थे। इसके पश्चात, राजा परीक्षित के मोक्ष और तक्षक नाग के आगमन की कथा सुनाई गई, जिसमें बताया गया कि कैसे श्रीमद भागवत के श्रवण मात्र से जीव को जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिल जाती है। यदुवंश का विनाश और श्रीकृष्ण का महाप्रयाण कथा के अंतिम सत्र में यदुवंश के विनाश, द्वारका के समुद्र में समाहित होने (द्वारका पतन) और शेषनाग के अवतार बलराम जी के योगप्रवेश का सजीव चित्रण किया गया। पंडित जी ने भगवान श्रीकृष्ण के स्वधाम गमन (महाप्रयाण) की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान की लीलाएं मनुष्य को धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। गरिमामयी उपस्थिति इस धार्मिक आयोजन के समापन अवसर पर क्षेत्र के प्रमुख समाजसेवी, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ नागरिक विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी ने व्यास पीठ का पूजन कर आशीर्वाद लिया। सफल आयोजन 25 दिसंबर से शुरू हुई इस कथा का समय प्रतिदिन प्रातः 11:30 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक रहा। सात दिनों तक चले इस ज्ञान यज्ञ में अठाना सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। कथा के उपरांत विशाल आरती और महाप्रसाद का वितरण किया गया।