अंधकार से प्रकाश की ओर: फारबिसगंज के अग्रवाल परिवार ने शोक की घड़ी में पेश की मानवता की अनूठी मिसाल नेत्रदान महादान: जाते-जाते दुनिया को अपनी आँखों से देख देख पाएंगे स्वर्गीय बृजमोहन अग्रवाल:-राज कुमार लढ़ा फारबिसगंज । जहां एक ओर नववर्ष के स्वागत में पूरा शहर उत्सव और उल्लास के रंग में डूबा हुआ था, वहीं दूसरी ओर दधीचि देहदान समिति एवं तेरापंथ युवक परिषद, फारबिसगंज के संयुक्त प्रयास से मानवता की सेवा की एक भावुक और प्रेरणादायक मिसाल प्रस्तुत की गई। संस्था के सहयोग से स्वर्गीय श्री बृजमोहन अग्रवाल का मरणोपरांत नेत्रदान कर दो नेत्रहीन व्यक्तियों को जीवन की नई रोशनी प्रदान की गई। यह पुण्य कार्य स्व. बृजमोहन अग्रवाल के पुत्र डॉ. अरुण अग्रवाल, अनिल कुमार अग्रवाल, डॉ. अनुराग अग्रवाल एवं अमिताभ अग्रवाल तथा पुत्री आशा गुटगुटिया सहित समस्त परिवारजनों की सहमति से कटिहार मेडिकल कॉलेज डॉ अतुल मिश्रा, डॉ अभिनव गुप्ता,डॉ मासूम,डर सनोवर,डॉ अमन के माध्यम से सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया। शोक की घड़ी में भी परिवार द्वारा लिया गया यह निर्णय समाज के लिए अनुकरणीय और प्रेरणास्रोत है। इस अवसर पर दधीचि देहदान समिति के जिलाध्यक्ष अजातशत्रु अग्रवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि दधीचि देहदान समिति एवं तेरापंथ युवक परिषद, फारबिसगंज के संयुक्त प्रयास से अब तक फारबिसगंज क्षेत्र में 25 से अधिक लोगों का मरणोपरांत नेत्रदान कराया जा चुका है। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति का नेत्रदान दो अंधकारमय जीवनों को दृष्टि का प्रकाश देने में सक्षम होता है। दधीचि देहदान समिति के सह सचिव राज कुमार लढ़ा ने कहा कि “नेत्रदान महादान है। स्वर्गीय बृजमोहन अग्रवाल एवं उनके परिवार द्वारा लिया गया यह साहसिक और मानवीय निर्णय समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत है। यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति इस विषय में जागरूक हो जाए तो अंधत्व जैसी गंभीर समस्या को काफी हद तक समाप्त किया जा सकता है।” तेरापंथ युवक परिषद, फारबिसगंज के अध्यक्ष आशीष गोलछा ने स्वर्गीय बृजमोहन अग्रवाल को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि परिवारजनों ने नेत्रदान जैसे पुण्य कार्य में सहयोग कर मानव सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। पंकज नाहटा ने दधीचि देहदान समिति एवं तेरापंथ युवक परिषद की जागरूकता पहल की सराहना करते हुए आम जन से इस अभियान से जुड़ने की अपील की। मौके पर उपस्थित चिकित्सक डॉ. बिजॉय वर्गिस ने नेत्रदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करते हुए बताया कि नेत्रदान में आंख नहीं बल्कि उसके अंदर की पारदर्शी परत (कॉर्निया) निकाली जाती है, जिससे शरीर की संरचना पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। उन्होंने बताया कि मरणोपरांत छह घंटे के भीतर परिवारजनों की सहमति से आई बैंक की सहायता से नेत्रदान संभव है और यह किसी भी उम्र के व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है। उस समय दिलीप गोलछा, राजेश पांडिया, मनोज अग्रवाल, पप्पू लड्डा, बछराज राखेचा, दिलीप खेमानी,मदन पण्डिय,अरविंद गोयल, कमल मित्तल,गणेश अग्रवाल,धनश्याम अग्रवाल, अमित चोखनी,संजय अग्रवाल ,राहुल ठाकुर, इंजिनियर आयुष अग्रवाल, गणेश अग्रवाल, महेंद्र बैद, भास्कर महनोत सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे और सभी ने इस मानवीय कार्य की मुक्त कंठ से सराहना की।