फारबिसगंज। स्थानीय शिशु भारती विद्यालय के समीप स्थित समाजसेवी श्री राम प्रकाश प्रसाद जी के निज निवास पर आयोजित आठ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ का रविवार को वैदिक मंत्रोच्चार और भक्तिमय वातावरण के बीच भव्य शुभारंभ हुआ। कथा के प्रथम दिन से ही पूरा इलाका भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। आयोजन की शुरुआत प्रातः भव्य कलश यात्रा के साथ हुई। सिर पर कलश धारण किए श्रद्धालु महिलाएँ, पुरुष और बच्चे जयकारों के साथ नगर भ्रमण करते हुए कथा स्थल तक पहुँचे। ढोल-नगाड़ों और “जय श्रीराम”, “राधे-राधे” के गगनभेदी उद्घोष से पूरा क्षेत्र भक्तिरस में डूब गया। व्यासपीठ से कथावाचक आचार्य श्री नारायण शर्मा ने श्रीमद्भागवत कथा के माहात्म्य पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि “घोर कलयुग में यदि कोई जीव भवसागर से पार हो सकता है, तो वह केवल श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से ही संभव है।” उन्होंने कहा कि भागवत कथा केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। जहाँ भक्ति का वास होता है, वहाँ ज्ञान और वैराग्य स्वतः प्रकट हो जाते हैं। प्रथम दिवस की कथा में शौनकादि ऋषियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों तथा राजा परीक्षित की जिज्ञासाओं का सुंदर और भावपूर्ण वर्णन किया गया। भीष्म पितामह की स्तुति के प्रसंग ने पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। अनेक श्रद्धालुओं की आँखें कथा सुनते हुए नम हो गईं। आचार्य श्री शर्मा ने भगवान के वराह अवतार और हिरण्याक्ष वध की कथा सुनाते हुए कहा कि “जब-जब धरती पर धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब भगवान किसी न किसी रूप में अवतार लेकर सृष्टि की रक्षा करते हैं।” कथा के समापन पर चतुश्लोकी भागवत की गूढ़ व्याख्या करते हुए बताया गया कि परमात्मा सृष्टि के कण-कण में व्याप्त हैं और वही इस जगत के आदि, मध्य और अंत हैं। इस अवसर पर यजमान श्री राम प्रकाश प्रसाद ने सपरिवार व्यासपीठ एवं श्रीमद्भागवत पोथी का विधिवत पूजन कर क्षेत्र की सुख-शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना की। कथा के दौरान प्रस्तुत भगवान वराह अवतार की सजीव झाँकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही। झाँकी को देखकर श्रद्धालुओं ने भगवान के जयकारे लगाए और भक्ति भाव में डूब गए। कथा के समापन के पश्चात बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। शिशु भारती स्कूल के नजदीक पूरा वातावरण देर शाम तक “जय श्रीराम” और “राधे-राधे” के जयघोष से गुंजायमान रहा। आचार्य श्री नारायण शर्मा ने बताया कि कथा के दूसरे दिन भगवान के विभिन्न अवतारों तथा ध्रुव चरित्र का विस्तारपूर्वक वर्णन किया जाएगा। उन्होंने अधिक से अधिक संख्या में श्रद्धालुओं से कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की। राम प्रकाश प्रसाद,धैर्य आनंद,मनीष दास,वर्णिका दास,अमरजीत कुमार,विजय प्रकाश,मनीषा प्रकाश,विजय कुमार,गणेश दास,अरविंद दास,दिनेश दास,पियूष कुमार,मोती लाल शर्मा,आनंद प्रकाश,मनोज दास,अनमोल कुमार,अमृत कुमार,कर्नल दास,शिव फिटकरिवाल,गौरव मरोठी,पूनम पण्डिय,मनोज गोयल,हीर्देये भगत,धनश्याम अग्रवाल,विजय लखोटिया,राजीव रमन भस्कर,अलका अग्रवाल,सुनीता गोयलशिवानी दास,प्रीति प्रभा,प्रभा प्रसाद,आरती देवी,मीनू कुमारी,निशा देवी,बेबी कुमारी,पूजा कुमारी,गीता देवी,नूतन दास,कुमुद शर्मा,सुनीता लढ़ा,कुसुम शर्मा, प्रभा सेठिया,लक्ष्मी गौतम,स्नेह लाता गौतम,दीपा अग्रवाल इत्यदि थे