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डीकेन। झुणजी महाराज बडावली की पावन धरा पर अखिल भारतीय छड़ीदार चारण समाज द्वारा आयोजित द्वितीय सामूहिक विवाह सम्मेलन अत्यंत भव्य, अनुशासित एवं ऐतिहासिक रूप से संपन्न हुआ। इस विराट आयोजन ने समाज की एकता, संस्कृति और परंपराओं की जीवंत मिसाल प्रस्तुत की। सम्मेलन में मध्यप्रदेश, राजस्थान एवं गुजरात से आए लगभग 5 से 7 हजार समाजजनों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को एक विशाल जनसमूह में परिवर्तित कर दिया। चारों ओर उल्लास, उत्साह और सामाजिक समरसता का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। इस पावन अवसर पर 20 जोड़े वैदिक मंत्रोच्चार एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ परिणय सूत्र में बंधे। विवाह समारोह सादगी, संस्कृति और सामाजिक आदर्शों का प्रतीक बना, जहां बिना आडंबर के संस्कारों को प्रमुखता दी गई। यह आयोजन समाज में बढ़ती कुरीतियों के विरुद्ध एक सकारात्मक संदेश भी लेकर आया। बाहर से पधारे अतिथियों का समाज द्वारा एवं मोगल सेवा समिति द्वारा आत्मीय स्वागत एवं सम्मान किया गया, जिससे आयोजन की गरिमा और भी बढ़ गई। पूरे आयोजन स्थल पर व्यवस्थाएं अत्यंत सुव्यवस्थित रहीं। भोजन, आवास, पेयजल, सुरक्षा एवं अन्य व्यवस्थाओं में समाज के कार्यकर्ताओं एवं स्वयंसेवकों का सराहनीय योगदान रहा, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं सफलतापूर्वक संपन्न हो सका। मंच का संचालन मुरली बिजुड़ा द्वारा प्रभावी एवं सुव्यवस्थित रूप से किया गया, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और भी बढ़ गई। मोगल सेवा समिति के अध्यक्ष शंकरलाल भोया ने अपने संबोधन में कहा कि यह आयोजन समाज की एकजुटता और सहयोग की भावना का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि सम्मेलन पूर्णत: शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हुआ, जिसके लिए सभी समाजजन, सहयोगकर्ता एवं कार्यकर्ता बधाई के पात्र हैं। अंत में मोगल सेवा समिति द्वारा सभी अतिथियों, समाजजनों एवं सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त किया गया। इस अवसर पर समाज के वरिष्ठजन, गणमान्य नागरिक, युवा वर्ग एवं मातृशक्ति की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को और भी गौरवपूर्ण बना दिया। सम्मेलन ने न केवल नवदंपतियों के जीवन की नई शुरुआत का साक्षी बना, बल्कि समाज में एकता, संस्कार और सहयोग का मजबूत संदेश भी प्रसारित किया। कुल मिलाकर यह सामूहिक विवाह सम्मेलन समाज के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया, जिसने सामाजिक समरसता और परंपराओं के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित किया।