फारबिसगंज। जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनिश्री प्रशांत कुमारजी एवं मुनिश्री कुमुद कुमारजी के पावन सान्निध्य में स्थानीय तेरापंथ भवन में विशेष प्रवचन सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भारी संख्या में उपस्थित श्रद्धालु जनों को संबोधित करते हुए मुनिश्री प्रशांत कुमारजी ने कहा कि हमारे आगमों में अनेकों ऐसे सूत्र समाहित हैं, जो मनुष्य को आत्म-कल्याण की राह पर आगे बढ़ाते हैं। हमें आगम के तीन सूत्रों—'वोसिरामि', 'मिच्छामि दुक्कड़म' और 'हमेशा हल्के रहने के भाव' को अपने व्यावहारिक जीवन में अवश्य अपनाना चाहिए। मुनिश्री प्रशांत कुमारजी ने 'वोसिरामि' की वैज्ञानिक व आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए कहा कि इसका सीधा अर्थ किसी भी अनावश्यक वस्तु या बुरे भाव का विसर्जन व त्याग करना है। यह सूत्र हमें हमेशा सत्पथ का मार्ग दिखाता है। हर श्रावक-श्राविका के लिए यह अनिवार्य है कि वे रात्रि में सोने से पूर्व चौरासी लाख योनि के जीवों से 'खमत-खामणा' (क्षमापना) करें और आत्म-चिंतन करें कि जाने-अनजाने उनके कारण किसी का दिल तो नहीं दुखा है। अगर ऐसा हुआ हो, तो तत्काल अपनी आत्मा की शुद्धि के लिए 'मिच्छामि दुक्कड़म' ले लेना चाहिए। उन्होंने समाज को सचेत करते हुए कहा, "यदि किसी ने आपके प्रति कटु वचन कहे हों, तो उन भावों को मन में दबाकर न बैठें। उस नकारात्मक विचार के साथ बीती एक रात्रि, आपकी आने वाली सौ रात्रियों के सुकून को खराब कर सकती है।" मुनिश्री ने स्वास्थ्य और अध्यात्म का अनूठा उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार चिकित्सक शरीर को निरोगी रखने के लिए वजन कम करने और हल्का बनने की सलाह देता है, ठीक उसी प्रकार मन को विचारों से हल्का रखने पर मनुष्य को कई मानसिक व शारीरिक बीमारियों से स्वतः निजात मिल सकती है। उन्होंने आगाह किया कि जीवन में कभी भी अहंकार को स्थान न दें, क्योंकि अहंकार हमेशा मनुष्य को अवनति और पतन के मार्ग की ओर अग्रसर करता है। सभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री कुमुद कुमारजी ने अहिंसा के सिद्धांत पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि मानव जीवन की सार्थकता इसी में है कि हम हमेशा अहिंसा के मार्ग पर चलें और अनावश्यक हिंसा से बचने का निरंतर प्रयास करें। किसी भी कार्य को करते समय अपने मन के भावों को सहज रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि भावों की अत्यधिक तीव्रता हमारी आत्मिक गति को बिगाड़ सकती है। आगामी बकरीद के पर्व के संदर्भ में मुनिश्री ने करुणा भाव जगाते हुए सभी को प्रेरित किया कि वे हजारों मूक प्राणियों की हिंसा की संभावना को देखते हुए उनकी आत्म-शांति हेतु सामूहिक रूप से सामायिक करें। इसके साथ ही उन्होंने सांयकाल 7 से 8 बजे के बीच सामूहिक रूप से नवकार महामंत्र के जप का विशेष आह्वान किया। प्रवचन सभा के उपरांत एक गरिमामयी उपक्रम में गुलाबबाग तेरापंथ सभा के नवनिर्वाचित अध्यक्ष मनोज पुगलिया और उनके साथ आए टीम के सदस्यों का नागरिक अभिनंदन किया गया। अध्यक्ष पद पर निर्वाचित होने के बाद मुनिसंघ के दर्शनार्थ पहली बार फारबिसगंज पहुंचे मनोज पुगलिया को स्थानीय तेरापंथ सभा के अध्यक्ष महेंद्र बैंद, मंत्री मनोज भंसाली एवं निर्मल मरोठी ने जैन प्रतीक चिन्ह पहनाकर और मंगलभावनाएं प्रेषित कर सम्मानित किया। वर्तमान में फारबिसगंज के तेरापंथ भवन में विराजित मुनिश्री प्रशांत कुमारजी एवं मुनिश्री कुमुद कुमारजी के सानिध्य से संपूर्ण स्थानीय जैन समाज सहित आम जनमानस में अभूतपूर्व उत्साह व उमंग का माहौल है। पूरे दिनभर तेरापंथ भवन में श्रद्धालु जनों का तांता लगा रहता है और क्षेत्रवासी मुनिश्री के दिव्य प्रवचनों का श्रवण कर आत्मिक शांति का अनुभव कर रहे हैं। मुनिसंघ की प्रेरणा से समय-समय पर विभिन्न आध्यात्मिक व सामाजिक चेतना के कार्यक्रमों का सफल संचालन किया जा रहा है।