जावद। जावद नगर में प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी बकरीद की नमाज़ ईदगाह में हुई। सर्वप्रथम समाजजनों द्वारा जावद शहर काजी सैयद आदिल कादरी साहब के घर से जुलूस के माध्यम से ईदगाह पहुंचे, जुलूस नीमच दरवाजा, माणक चौक, खुर्रा चौक से होते हुए ईदगाह तक पहुंचा। डॉक्टर हाफिज नईम इकबाल साहब ने ईद उल अजहा (कुरबानी) के बारे मे बताया कि हम इस महिने में अल्लाह (ईश्वर) को खुश करने के कुरबानी करते है और अल्लाह के घर (मक्का एवम मदीना) की यात्रा हज करते है। शहर काजी आदिल कादरी साहब ने बताया की अल्लाह की रजा (खुशी) के लिए हम सभी कुर्बानी करते हैं। कुर्बानी आसानी से करे, कोई भी दिखावा ना करे, खुले में अपने जानवरो को कुर्बान ना करे। साफ सफाई का पूरा ख्याल रखे। शहर काजी आदिल कादरी साहब के बहनोई डॉक्टर नईम इकबाल साहब ने ईदगाह में ईद उल अजहा की नमाज अदा करवाई। काजी साहब सैयद आदिल कादरी साहब ने जावद शहर की अमन शान्ति की दुआ की, जावद शहर के सभी मुस्लिम भाईयो को ईद की मुबारक बाद दी। उन्होने सबसे अहम बात बताई की कुर्बानी के फोटो और वीडियो सोशल साईट पर नहीं डाले कोई भी आपत्तिजनक या मेसेज पोस्ट न करे चाहे वो किसी भी धर्म से हो, ऐसा कोई भी कार्य ना करे जिससे किसी भी भावना आहत हो। नमाज के बाद जावद शहर काजी सैयद आदिल कादरी साहब ने जावद एसडीएम, एसडीओपी, थाना प्रभारी, तहसीलदार, पटवारी एवम अन्य पुलिस प्रशासन के स्टाफ से मुलाकात कर ईद की शुभकामना प्रेषित की। क्या है इस त्यौहार का महत्व :-ईदुल अज़हा, जिसे बकरीद भी कहा जाता है, यह त्यौहार इस्लाम धर्म का दूसरा सबसे प्रमुख त्योहारो मे से एक है, जिसे 'बलिदान (कुर्बानी) का पर्व' भी कहा जाता है। यह त्योहार पैगंबर हज़रत इब्राहिम अलेहिस्सलाम द्वारा अल्लाह के प्रति दिखाए गए अटूट विश्वास, प्रेम और समर्पण की याद में मनाया जाता है। यह त्योहार सभी को एक-दूसरे के साथ मिल-जुलकर रहने और सामाजिक समरसता का संदेश देता है। इस दिन लोग एक साथ विशेष नमाज अदा करते हैं, एक-दूसरे को गले मिलकर "ईद मुबारक" कहते हैं और आपसी गिले-शिकवे भुलाकर भाईचारे को मजबूत करते हैं। ईदुल अज़हा का पर्व वार्षिक हज यात्रा के समापन पर आता है। मक्का - मदीना (सऊदी अरब) में हज करने वाले दुनिया भर के मुसलमान इस दिन कुर्बानी की रस्म पूरी करते हैं, जिससे उनकी हज यात्रा संपूर्ण मानी जाती है। ईदुल अज़हा केवल पशु बलि का त्योहार नहीं है, बल्कि यह अपने अहंकार और सबसे प्यारी चीज़ों को अल्लाह की राह में न्यौछावर करने की सीख देता है। इसके जरिए इंसान में सब्र (धैर्य), परोपकार और इंसानियत के मूल्यों को बढ़ावा मिलता है। दुनिया भर के मुसलमान इसे बड़ी धूमधाम से मनाते हैं, इस दिन ईदगाह मस्जिद में विशेष नमाज अदायगी के बाद देश में अमन चैन खुशहाली की विशेष दुआएं भी की जाती है। इस्लामी मान्यता के अनुसार ईद-उल-अज़हा पर दी जाने वाली कुर्बानी को तीन हिस्सों में बांटा जाता है। इसका पहला हिस्सा परिवार के लिए, दूसरा रिश्तेदारों के लिए और तीसरा हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों के लिए होता है जिसे दान किया जाता है। यह प्रथा समाज में समानता, प्रेम और जरूरतमंदों की मदद करने की भावना को बढ़ावा देती है। इसके साथ ही इस त्यौहार पर गरीब, जरूरतमंदों की ज्यादा से ज्यादा मदद और सेवाकार्य कर सवाब (पुण्य) अर्जित करना चाहिए। नगर में साफ सफाई की व्यवस्था एवम पुलिस प्रशासन के जाप्ते को लेकर ईदगाह कब्रिस्तान के जिम्मेदारों ने सभी का आभार माना। वही जावद नगर की प्रमुख मस्जिदों में ईद की नमाज अदा की है, सभी ने देश में अमन चैन की दुआ मांगी। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी हबीब राही द्वारा दी गई।