फारबिसगंज। आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनिश्री प्रशांत कुमारजी एवं मुनिश्री कुमुद कुमारजी के सान्निध्य में शनिवार को ब्रह्माण्डीय ऊर्जा, जैन मंत्रों द्वारा सप्त चक्र जागरण एवं पंच परमेष्ठी अनुष्ठान का विशेष आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लेकर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। विशेष प्रयोगात्मक अनुष्ठान का संचालन करते हुए मुनिश्री प्रशांत कुमारजी ने कहा कि सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों प्रकार की ऊर्जाएं विद्यमान हैं। मनुष्य जिस ऊर्जा की ओर आकर्षित होता है, वही उसे प्राप्त होती है। इसलिए जीवन में सकारात्मक ऊर्जा को ग्रहण करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंच परमेष्ठी एवं अनंत तीर्थंकरों की पवित्र ऊर्जा ब्रह्माण्ड में व्याप्त है, जिसे समर्पण, विनय, कृतज्ञता एवं वंदना के माध्यम से आत्मसात किया जा सकता है। मुनिश्री ने बताया कि ब्रह्माण्ड से प्राप्त होने वाली दिव्य ऊर्जा हीलिंग पावर से युक्त होती है, जो शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक समस्याओं के समाधान में सहायक बनती है। सप्त चक्रों के जागरण से शरीर में उत्साह, सृजनात्मकता, आशा एवं उल्लास का संचार होता है तथा मानसिक एवं शारीरिक लाभ प्राप्त होते हैं। कार्यक्रम की शुरुआत में सभा अध्यक्ष महेन्द्र बैद ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। इस अवसर पर दुहबी (नेपाल) के विमल मालू, कटिहार की सुषमा पटावरी, फारबिसगंज की नीलम बोथरा एवं निर्मल मरोठी ने अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम का संचालन मुनिश्री कुमुद कुमारजी ने किया तथा आभार ज्ञापन सभा मंत्री मनोज भंसाली ने किया। अनुष्ठान में भारत एवं नेपाल के विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।