फारबिसगंज। बिहार की दूसरी सबसे बड़ी जूट मंडी फारबिसगंज में किसानों एवं जूट व्यवसायियों की बढ़ती समस्याओं को लेकर फारबिसगंज जूट डीलर्स एसोसिएशन की एक महत्वपूर्ण बैठक स्थानीय गोलछा उद्योग परिसर में संघ के अध्यक्ष मूलचंद गोलछा की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में जूट व्यवसाय से जुड़ी विभिन्न समस्याओं पर चर्चा करते हुए विशेष रूप से जूट से लदे वाहनों के लिए पर्याप्त पार्किंग एवं क्रय स्थल की कमी का मुद्दा उठाया गया। व्यवसायियों ने बताया कि वर्ष 1970 के दशक में फारबिसगंज कृषि उत्पादन बाजार समिति परिसर में जूट से लदे वाहनों के ठहराव के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी, जिसे बाद में जूट मंडी के नाम से पहचान मिली। लेकिन समय के साथ इस क्षेत्र पर अस्थायी दुकानदारों द्वारा अतिक्रमण कर लिए जाने से वाहनों के खड़े होने की जगह काफी सीमित हो गई है। स्थिति यह है कि जूट लेकर आने वाले किसानों को अपने वाहन सड़क किनारे खड़े करने पड़ रहे हैं, जिससे शहर में यातायात जाम की समस्या और गंभीर होती जा रही है। व्यवसायियों ने बताया कि इस वर्ष किसानों का रुझान जूट की खेती की ओर बढ़ा है तथा मंडी में पिछले वर्षों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक जूट आने की संभावना है। ऐसे में यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो जाम की समस्या विकराल रूप धारण कर सकती है। बैठक में सर्वसम्मति से अनुमंडल पदाधिकारी अभय कुमार तिवारी द्वारा शहर को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की गई। साथ ही जूट व्यवसायियों की समस्याओं के समाधान हेतु संघ के अध्यक्ष मूलचंद गोलछा के नेतृत्व में पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गठित करने का निर्णय लिया गया। यह प्रतिनिधिमंडल एसडीओ से मिलकर ज्ञापन सौंपेगा तथा फारबिसगंज कृषि उत्पादन बाजार समिति के गेट संख्या-4 के प्रवेश द्वार के अंदर दक्षिणी भाग में हुए अतिक्रमण को हटाने की मांग करेगा, ताकि जूट उत्पादक किसानों एवं व्यवसायियों को राहत मिल सके। बैठक में बछराज राखेचा, धीरेंद्र दूगड़, महेंद्र वेद, त्रिलोक अग्रवाल, हेमू बोथरा, प्रेम साह, राजेंद्र वेद, भंवरलाल डाकलिया, प्रदीप वैद, छोटू बोथरा, संजय बछावत, ललित अग्रवाल, गुड्डू बोथरा, निर्मल भगत, बंटी राखेचा, अशोक गुप्ता एवं गुड्डू बियानी सहित कई जूट व्यवसायी एवं आढ़तिया उपस्थित थे।